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ईसाई धर्म का प्रसार पॉल से पहले अन्य लोगों द्वारा किया गया था। प्रारंभिक ईसाई धर्म का प्रसार मुख्य रूप से यीशु के शिष्यों और उनके अनुयायियों द्वारा किया गया था। यीशु के पुनरुत्थान के बाद, उनके शिष्य और अनुयायी यरूशलेम और उसके बाहर उनके संदेश का प्रचार करने के लिए निकले। प्रेरितों के काम की पुस्तक में, हम पाते हैं कि कैसे पवित्र आत्मा ने शिष्यों को साहस और शक्ति दी जिससे वे यीशु के पुनरुत्थान और उनके शिक्षाओं का प्रचार कर सकें। पवित्र आत्मा के आगमन के दिन, जिसे पेंटेकोस्ट के रूप में जाना जाता है, प्रेरित पतरस ने एक शक्तिशाली संदेश दिया जिसने कई लोगों को ईसाई धर्म की ओर आकर्षित किया [प्रेरितों के काम 2:1-41]। इसके अलावा, शिष्य जैसे कि फिलिप, जो समारिया में गए और वहां के लोगों को सुसमाचार सुनाया [प्रेरितों के काम 8:4-8], और अन्य शिष्य जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जाकर ईसाई धर्म का प्रचार किया, इन सभी ने ईसाई धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन प्रारंभिक प्रयासों ने ईसाई धर्म की नींव रखी और पॉल के मिशनरी कार्यों के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जिन्होंने बाद में इसे और भी व्यापक रूप से फैलाया।

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